Saturday, March 26, 2011

बचपन

एक बचपन का जमाना था
खुशीयों का खजाना था !

चाहत चांद को पाने की थी,
दिल तितली का दिवाना था!

खबर न थी कुछ सुबह की,
ना शामों का ठिकाना था!

थक-हारके आना स्कूल से,
फिर खेलने भी जाना था!

दादी की कहानी थी,
परीयों का फसाना था!

बारीशमें कागजकी कश्ती थी,
हर मौसम सुहाना था!

हर खेलमें साथी थे,
हर रिश्ता निभाना था!

गमकी जुबान ना होती थी,
पर जख्मों का पैमाना था!

रोनेकी वजह ना होती थी,
ना हसने का बहाना था!

अब ना ही वो ज़िंदगी है,
ना वो बचपन का ज़माना है!

-
Unknown